Holi Essay in Hindi Holi Par Nibandh Hindi Mein

Holi Essay in Hindi Holi Par Nibandh Hindi Mein :होली की हार्दिक सुभकामनाएँ.

सबसे पहेले होली के इस सुन्हेरे मौके पर, आप को आपके पूरी Family को Achhisoch.com की तरफ से हार्दिक सुभकामनाएँ आज इस सुन्हेरे मौके पर में कुछ रोचक जानकारी पेश कर रहा हूँ इस Post के माध्यम से Holi Essay in Hindi and Holi Par Nibandh Hindi Meinमित्रों होली का त्यौहार (Festival) आते ही लोगों के चहेरे पर रोनक आजाती है, एक तरह से लोगों के दिलों में खुशी पैदा होजाती है. और खुशी हो भी क्यूँ न क्यों की ये एक ऐसा त्यौहार है जिसमे सभी लोग अपने पुराने गिले सिक्वे भूल कर एक दुसरे से गले मिलते हैं. बच्चों से लेकर बड़े सभी धूम धाम से इस त्यौहार को मनाते हैं. ये होली का त्यौहार रंगों के त्यौहार से भी जाना जाता है.

ये हमारे संस्कृति से जुड़ा हुआ एक लोकप्रिय त्यौहार है, इस Festival के पीछे कई कथाएं भी जुड़ी हुयी हैं. Holi Festival जो है वो होलिका (Holika) और फागवा (Phagwa) के नाम से भी जाना जाता है, ये वार्षिक उत्सव है जो मार्च (March) महीने में पूर्णिमा के बाद मनाया जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं में ये त्यौहार विभिन्न घटनाओं की याद दिलाता है.

इस रंग बिरंगे होली के त्यौहार के दिन लोग सभी भेद भाव भूल कर एक दुसरे से गले मिलते हैं, बच्चों से लेकर बड़े तक सभी जश्न मनाते हैं, सभी लोग होली के त्यौहार आने से पहेले ही तरह तरह की तय्यरियाँ शुरू कर देते हैं, जैसे की नये नये कपडे लेना, घरों को सजाना, रिश्तेदारों को न्योता देना. औरतें कई किस्म की पकवान, मिठाईयाँ बनाती हैं. ख़ास कर बच्चे लोग पिचकारियाँ और गुब्बारे लेते हैं और खूब मजे से एक दुसरे पर रंग डालते हैं. इस दिन जल्दी सवेरे उठकर लोग एक दुसरे रिश्तेदारों के यहाँ भी जाते हैं और मिल जुल कर होली मनाते हैं.

होली का त्यौहार एकता का प्रतीक है, सच मायेने में Holi का त्यौहार इस बात का संकेत देता है की बुराई पर हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है, पुरे भारत में इस त्यौहार को लोग धूम धाम से मनाते हैं. खास करके काशी (Kashi), मथुरा (Mathura), और व्रंदावन की होली काफी मशहूर मानी जाती है.

Holi ki Shuruwaat kabse huyi (Holi Essay in Hindi and Holi Par Nibandh Hindi Mein) आईये जानते हैं कुछ रोचक बातें.

Prahlad Aur Holika Ki Kahani — प्रहलाद और होलिका की कहानी

क्या आपको पता है होली क्यों मनाते हैं, क्या आप जानते हैं की होली खेलने की शुरुआत कितने सालों पहेले हुयी हुयी थी, दोस्तों हजारों साल पहेले इस लोकप्रिय त्यौहार की शुरुआत हुयी, अगर नहीं पता है तो बेफिकर रहिये आज हम इस Post में जानेंगे पूरी कहानी इस होली पर.

मित्रों कई साल पहेले की बात है एक दुष्ट (Dusht) राजा था, जिसका नाम Hiranyakashipu (हिरान्यकशिपू) था. जो बहुत ताक़तवर था पूरा राज्य उस से डरता था, पुरे राज्य में उसकी हुकूमत थी, और सबसे कहेता था की सिर्फ़ मेरी पूजा करो भगवान् को भूल जाओ अब में ही तुम्हारा भगवान् हूँ और जो मेरी पूजा नहीं करेगा उसे सख्त से सख्त सजा दी जायेगी ये उसका फरमान था.

इसीलिए हर कोई उसकी पूजा किया करता था, सिवाए एक जन को छोड़कर “Prahlad” प्रहलाद उसका खुदका पुत्र. Prahlad (प्रहलाद) विष्णु भगवान् का एक सच्चा भक्त था जो काफी हुशियार, समझ्धार था हमेशा सच बोलता था. Prahlad (प्रहलाद) अपने पिता से डरे बगैर विष्णु भगवान् (Vishnu Bhagwan) की पूजा किया करता था, सुबह शाम, दिन रात वो इस पूजा में व्येस्त रहेता था, और यही बात Hiranyakashipu (हिरान्यकशिपू) को बिलकुल पसंद नहीं थी. इस दुष्ट राजा ने कई बार Prahlad को इस बात को लेकर चेतावनी भी दी थी, लेकिन Prahlad ने उसकी बिलकुल भी नहीं सुनी, तो Hiranyakashipu ने तंग आकर अपने सिपाहियों को हुक्म दिया की जाओ और Prahlad को मेरी सभा में लाओ उसका ये आदेश सुनकर रानी यानी Prahlad की माँ डर से काँप उठी, दूसरी तरफ Hiranyakashipu (हिरान्यकशिपू) के सिपाही दोड़ते हुए गए और Prahlad को पकड़ कर ले आये. Prahlad को अपने पिता के सामने खड़े होकर पहली बार डर लग रहा था, क्यूँ की उसके पिता की आँखें गुस्से से लाल हो चुकी थी, जैसे जलते हुए अंगारे के तरह, तभी राजा ने बहुत भारी आवाज में Prahlad से कहा बताओ इस दुनिया में सबसे महान कोन है, में या विष्णु?

Prahlad अपने पिता की आवाज सुनकर काँप उठा लेकिन तभी उसे अपनी माँ की कही हुयी एक बात याद आई, बेटे Prahlad कुछ भी होजाए, कितनी भी बड़ी मुसीबत आजाये, तुम कभी किसी से झूट मत बोलना जो मन्न में है उसे सच्चे दिल से बता देना, Prahlad ने बिलकुल ऐसा ही किया और उसने अपने पिता से डरे बगैर कहा की सबसे महान तो विष्णु जी हैं आप तो बस एक राजा हैं, मगर विष्णु जी तो एक भगवान् हैं Prahlad का ये दुष्साहस देख कर पूरी सभा एक दम चकित रह गयी, सभी Prahlad की सच्चाई देख कर बहुत खुश होरहे थे, इसी वजह से राजा का गुस्सा और बढ़ गया उसने सोचा की Prahlad को सबक अब कैसे भी करके सिखाना होगा. उसने अगले ही पल अपने सिपहियों को अगला आदेश दिया की सिपाहियों जाओ और इस लड़के को खायी में फेंक दो. राजा के ये आदेश सुनकर पूरी सभा चकित रह गयी, Prahlad की माँ तो बेचारी बेहोश होगयी ये दुष्ट राजा के सिपाहियों ने Prahlad के हाथ-पैर बेड़ियों से बाँध दिए. और अगले ही पल उन सिपाहियों ने Prahlad को खायी की और फेंक दिया. Prahlad ने डर के मारे आँखें बंद करली और भगवान् विष्णु को याद करने लगे, भगवान् विष्णु जी ने हवा का एक तेज झोंका Prahlad की और फेंका और Prahlad हवा में झूलता हुआ आराम से जमीन पर उतर गया. Prahlad ने विष्णु जी को धन्यवाद कहा और राजमहल में चला गया, जब राजा को पता चला की Prahlad अभी भी जिन्दा है तो वो गुस्से से आग बबूला होगया.

उसकी इस हालत को देख कर उसकी डायन जैसी दिखने वाली बहेन Holika (होलिका) ने उसे कहा भय्या आप इतने परेशान क्यों होते हो, prahlad को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी मुझ पर छोड़ें, आप बस आग का इन्तिजाम कीजिये और prahlad को मेरे पास भेज दीजिये. अगली सुबह राजमहल के आँगन में लकड़ियों का अंबार लगा दिया गया. इसके बाद होलिका के कहेने पर उन लकड़ियों में आग लगा दी गयी, आग की लपटें इतनी जियादा थीं और इतनी बड़ी थीं की सोने का बना Hiranyakashipu का महल जगमगा उठा. अगले ही पाल होलिका (Holika) ने Prahlad को अपने पास बुलाया और आग की तरफ बढ़ने लगी. यह देख कर Hiranyakashipu ने Holika को रोका और कहा Holika यह किया कर रही हो. तुम आग से जल जाओगी होलिका राजा Hiranyakashipu की बात सुनकर मुस्कुराने लगी और कहा की भय्या चिंता मत करो मुझे ये वरदान मिला है की आग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है यह आग तो मेने Prahlad को मारने के लिए जलाई है. में Prahlad को आग में लेकर कूद जाउंगी वो मर जाएगा और में अपने वरदान से बाख जाउंगी. Holika की ये बात सुनकर Hiranyakashipu  बहुत खुश हुआ और उसने Holika को आग में जाने की इजाजत देदी. Holika खुशी खुशी आग में Prahlad को प्लान के मुताबिक आग में लेकर कूद पड़ी. Prahlad की माँ तो जैसे मूर्ति बन कर रेह गयी.

मगर ये किया आग में Prahlad की जगह Holika की चीखने की आवाज सुनाई देरही थीं, भय्या मुझे बचालो में जल रही हूँ और ये prahlad तो आराम से आँखें बंद करके बेठा हुआ है. कहेते हैं न (जैको राखे साईयाँ मार सके न कोए- बाल न बाका कर सके चाहए बेरी जग होए). दर असल Holika अपने घमंड में यह बात भूल गयी थी की उसको मिला हुआ वरदान तभी काम आता जब वो अकेले आग में जाती थी. मगर यहाँ तो उसके साथ साथ Prahlad भी था, जिसके ऊपर भगवान् विष्णु का भी हाथ था, और इसी तरह डायन Holika अपने ही बनाये जाल में फंस गयी और जलकर राख होगयी उसका दुष्ट बड़ा भाई Hiranyakashipu उसके लिए कुछ भी नहीं कर सका और देखते रह गया अपनी बहेन की मौत. थोड़ी देर में आग शांत हुयी और Prahlad सही सलामत बाहर निकल आया, भगवान् विष्णु जी ने अपने भक्त की फिरसे एक बार जान बचा ली थी, और तब से लेकर अब तक होली मनाई जाती है क्यूँ की Holika के जलने से यह बात एक बार फिर से साबित होगयी थी की बुराई पर हमेशा ही अच्छाई जीतती है.

इस कहानी से हमें किया सिख मिलती है — Moral Of This Story

  1. हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए, क्यूँ की जो सच्चाई का साथ देता है उसका ऊपर वाला भी साथ देता है.
  2. कभी किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए, क्यों की अगर आप किसी का बुरा चाहोगे तो अंत में आपका ही बुरा होगा.

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“Top 5 बातों से रहें सावधान इस होली में”

  1. जैसा की आप सब जानते हैं और देखते भी हैं की, रंगों में कई प्रकार की मिलावटें पायी जारही हैं, जो हमारी त्वचा और जिस्म को बहुत हानिकारक पंहुचा सकते हैं तो ऐसे मिलावटी रंगों से दूर रहें, और साथ में अच्छे Quality रंगों का प्रयोग करें.
  2. नशे और हानिकारक चीजों से परहेज बरतना चाहिए. उर साथ में जल (Water) जो हमारा जीवन है उसे व्यर्थ ना जानें दें.
  3. बच्चों को तो खासकरके बहुत सावधानी बरतनि  चाहिए, क्यूँ की गुब्बारे फेकते समय किसी के आँख में नहीं लगनी चाहिए, आँखों में जाने से आँखों में जलन पैदा होसकती है, जिसके कारण घाव भी बन सकता है.
  4. साथ साथ हमें अपने आस पड़ोस का भी ख्याल रखन चाहिए, हमारी वजह से किसी को तकलीफ नहीं पहुचना चाहिए जाने अनजाने में.

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Specially Thanks करना चाहूँगा इस Post के लिए करण सर (किलकारियां) को जो करण चाचू के नाम से बच्चों में फेमस हैं.

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