Motivational Stories about life in hindi |प्रेरणादायक कहानी

True Motivational Stories about life/work in Hindi:

दोस्तों नमस्कार, आज का पोस्ट थोडा बड़ा (Long) है लेकिन बहुत ही inspirational motivational stories है जो हमारी life/work  और हमारे सोचने के नजरिये को दर्शाती है. उम्मीद करता हूँ ये प्रेरणादायक हिंदी कहानी आपको जरुर पसंद आएगी.

“लाभ लोभ का जनक”

पुराने जमाने की बात है, एक राजा (Raja) और उसके प्रिय मंत्री घुमने निकले, चलते-चलते राजा की नजर व्यापारी पर पड़ी जो दूकान पर चिंतित और उदास बेठा था. राजा के कहेने से मंत्री ने व्यापारी को बुलाया और उदासी का कारण पूछा. उस व्यापारी ने नम्रता के साथ कहा, राजन! में साधारण व्यापारी हूँ, इस वर्ष जाड़े के मोसम में अपना सारा धन लगा कर 500 कंबल ख़रीदे थे परन्तु भाग्य ऐसा निकला की ठंढ के दिन समाप्त होने को आये हैं और एक भी कंबल नहीं बिका, यह बात सुनकर राजा के ह्रदय में दया का भाव उदय हो गया.

दुसरे दिन राजसभा में राजा ने सभी सभासदों के समक्ष एक संदेश प्रसारित किया की कल जो भी सभा में आएगा, अपने साथ एक नया कंबल अवश्य लेकर आएगा. जो नहीं लाएगा उस पर 500 रूपये जुर्माना होगा. आश्चर्य से भर देने वाली ये सुचना सुनकर सभी अचंभे में पड गए  लेकिन कारण पूछने की हिम्मत किसी की नहीं हुयी.

शाम को सभा समाप्त होने पर सभी सभासद उसी व्यापारी की दूकान पर पहुचं गए, व्यापारी आश्चर्य में पड़ गया की आज तो ग्राहक पर ग्राहक दूकान पर आरहे हैं. मन ही मन वो व्यापारी प्रसन्न भी हुआ और उसने ढाई रूपये वाला कंबल पांच रूपये (5) में बेचना शुरू कर दिया. जब कुछ कंबल बिक गए तो उसने देखा की चार-पांच ग्राहक और आरहे हैं, फिर उसने पांच के बजाये पच्चीस रूपये (25) में देना शुरू कर दिया फिर भी सारे कंबल थोड़ी देर में ही बिक गए.

अपनी आवश्यकता के लिए उसने एक कंबल बचा कर रख लिया था, अंत में मंत्री जी भी उसी दूकान पर कंबल लेने पहुँच गए और दुकानदार को कहा, मुझे एक कंबल जरुर चाहिए, चाहए कीमत कितनी भी लेलो, व्यापारी ने कुछ देर सोचकर अपने लिए रखा हुआ कंबल निकाल दिया और कहा, पुरे ढाई सो रूपये लूँगा, मंत्री ने सोचा, चलो (250) ढाई सो रूपये ही तो खर्च होंगे, नहीं तो कल दरबार में तो 500 रूपये दंड के देने होंगे इसीलिए उन्होंने कंबल खरीद लिया.

मंत्री जी के जाने के बाद व्यापारी फिर सोच में पड़ गया की अगर में सारे कंबलों को 250 रूपये के ही हिसाब से बेचता तो आज एक लाख पच्चीस हजार रूपये (125000) होते किंतु मेने समय को नहीं पहेचाना, वह फिर उदास होगया, शाम को राजा और मंत्री घुमने निकले तो राजा ने मंत्री से कहा, आज वह बनिया (व्यापारी) बड़ा ही खुश होगा, में उसे देखना चाहेता हूँ यह सुनकर मंत्री ने कहा, राजन इस मानव की बड़ी विचित्र गति है.

राजा ने जाकर देखा की व्यापारी फिर उदास बेठा था, राजा ने उसे बुलाकर पूछा की आज तो तेरा सारा माल बिक गया है फिर तू क्यों उदास बेठा है? वह लग-भग रोते हुए बोला, राजन ! आपकी दया से मेरे सारे कंबल तो बिक गए पर पश्चाताप एक ही बात का है की सारे कंबल 250 रूपये प्रति कंबल के हिसाब से बेचता तो कितना धनवान होजाता.

आश्चर्य में पढ़कर राजा ने मंत्री की और देखा, मंत्री ने कहा राजन! यह हर मनुष्य की कहानी है, जितना लाभ बढ़ता है, उतना ही लोभ बढ़ता जाता है. यह व्यापारी कल माल न बिकने पर परेशान था, आज माल बिक जाने पर भी परेशान है, इसीलिए तो कहा है-

ज्यों-ज्यों लाभ वृद्धि को पावे, त्यों-त्यों लोभ भागता आवे.

Moral Of this motivational stories for work

जैसा की हम सभी जानते हैं और सुनते हैं आये हैं की लालच बहुत बुरी बला है, और ये बात सही भी साबित होती है, मित्रों हमारे जीवन में जो भी है उसी में खुश रहेना चाहिए, क्यूँ की लालच से हमारा ही नुक्सान है, आप सभी  भाई बहेनों से निवेदन है की यदि वे किसी वस्तु का व्यापार करते हैं तो उन वस्तुओं पर उचित कमीशन लगा कर मूल्य निर्धारीत कर लें और उसी मूल्य पर प्रत्येक ग्राहक को बेचें अन्यथा आप भी उस व्यापारी की तरह ही माल न बिकने पर भी परेशान और माल बिकने पर भी परेशान होंगे.

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