Jeevan ki Story in Hindi | जीवन की खोज एक कड़वा सत्य

Jeevan ki Story in Hindi: जीवन की खोज

एक था दुर्ग | वह दुर्ग अति विशाल था, चोरासी लाख उसके द्वार थे और एक अतिरिक्त सभी द्वार बंद. एक निर्धन नेत्रहीन प्राणी उसमे कारवास भोग रहा था. वह खुजली के रोग से ग्रस्त, नेत्र-विहीन था, उस नेत्रहीन को बाहर जाने का मार्ग मालुम नहीं था.

किसी व्यक्ति ने उसे दुखी देख कर पूछा इस दुर्ग से बाहर जाना चाहेते हो, उस नेत्रहीन व्यक्ति ने दबे हुए सब्दों में कहा जी हाँ बहुत दुखित हो चूका हूँ. “पूछने वाले को करुणा आगयी- और उसने कहा- सुन अभागे ! चोरासी लाख द्वार हैं यहाँ, किंतु एक के अतिरिक्त सभी बंद हैं, उनके साथ टकराने से कुछ लाभ नहीं, इस दीवार पर हाथ रख कर चलते जाओ, जहाँ पर खुला द्वार होगा वहां से बाहर निकल जाना.

अन्धे ने कहा ठीक है- मेरा हाथ दीवार पर रख दो, और वो नेत्रहीन व्यक्ति उसी प्रकार चलता गया. वो नेत्रहीन व्यक्ति चक्कर काट कर खुले द्वार के पास पहुंचा, तो फिर खुजली हुयी फिर द्वार निकल गया, इसी प्रकार वह अब चलता जाता है.

हिंदी सत्य सुविचार:-

आत्मा ही वह नेत्रहीन व्यक्ति है, चोरासी लाख द्वार, चोरासी लाख योनियाँ हैं, खुला द्वार मानव शारीर है, खुजली वह वासनामय अग्नि है, जो मनुष्य को यह देखने नहीं देती की द्वार खुला है. खुजली करने में स्वाद आता है अवश्य, रक्त-स्त्राव होने लगा है, वर्ण भी बढ़ जाता है, किन्तु आकांक्षाओं की यह खुजली विश्राम तो लेने नहीं देती. इस से बच सको तो द्वार खुला है, बाहर चले जाओ नहीं तो घूमते रहो इसी दुर्ग में.

यह है मानव शरीर की उत्कृष्टता, यह है वो कारण जिस से इसको सबसे बड़ा और सबसे श्रेष्ठ कहा गया. इसको ऋषि-भूमि, देवपुरी और ब्रह्मपूरी कहा गया, यह मोक्ष का द्वार है. कई लोग इस बात को सुनकर कहेते हैं- “हाय ! हमने तो यह जीवन (व्यर्थ कर दिया) खो दिया, कई लोग अपने जन्मदिवस मनाते हैं, प्रसन्न होते हैं की अब चालीस वर्ष के होगये, अब पचास के, अब साठ के.

में इनकी प्रसन्नता देखता हूँ तो चकित होता हूँ- अरे ! प्रसन्नता किस कारण से? जिस अमूल्य जीवन को नष्ट कर दिया, उसकी प्रसन्नता मनाते हो? चालीस, पचास, साठ वर्ष तुमने खुजली करने में बिता दिये. खुला द्वार निकल जाता है, होसके तो संभालो ! बाहर चलने की तय्यारी करो, अन्यथा फिर वही बन्द दुर्ग है, फिर वही तिरासी लाख निन्यानवे हजार नौ सौ निन्यानवे द्वार हैं.

पढ़ें प्रेरणादायक हिंदी स्टोरी (Hindi Story) ऐसा झूट भी सत्य से बढ़कर है 

हमें कोई समय पर ही याद करे तो हमें अच्छा नहीं लगता है, फिर भगवान को हम जरुरत के समय ही याद करें तो भगवान को अच्छा लगता होगा क्या.

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3 thoughts on “Jeevan ki Story in Hindi | जीवन की खोज एक कड़वा सत्य

  • August 7, 2016 at 12:14 am
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    Ye ek kadwa sach hai..bahot hi sahi kaha apne abdul sir.. me apki site daily visit karta hun yaha se mujhe bahot si nayi baaten sikhne mili hai aapki likhi kahani padhke bahot hi khusi milti hai.

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  • February 28, 2017 at 6:03 pm
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    sir only hamari soul ke 84 janm hohe h…
    84 laakh nahi

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